
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह किस्मत के धनी… कांग्रेस पार्टी के भीतर और भाजपा को सिखाया राजनीति का सबक
शिमला विमल शर्मा : मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह किस्मत के धनी… कांग्रेस पार्टी के भीतर और भाजपा को सिखाया राजनीति का सबक ……………
हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह किस्मत के धनी व्यक्तित्व वाले साबित हुए हैं उपचुनावों में देहरा से उनकी पत्नी कमलेश ठाकुर चुनाव जीत गई और नालागढ़ से भी कांग्रेस की हरजीत सिंह बाबा चुनाव जीत गए जहां तक हमीरपुर जिला की बात है वहां पर भी कांग्रेस ने अच्छी बढ़त बनाई लेकिन कुछ मतों से कांग्रेस सीट नहीं ले पाई इन उपचुनाव में यह बात तो साफ हो गई भाजपा नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री प्रतिपक्ष नेता ठाकुर जयराम को सबसे ज्यादा नुकसान दिखाई पड़ रहा है उनका सीएम पद पर बैठने की ख्वाहिश शायद ख्वाहिश ही रह गई उल्टे उन्हें पार्टी के भीतर भी इस नुकसान को लेकर कहीं ना कहीं जवाब देते नहीं बनेगा राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं की इन उपचुनाव में सबसे ज्यादा वज्रपात ठाकुर जय राम पर ही हुआ पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा की रणनीति के तहत भाजपा को एक करारा झटका मिला वहीं पूर्व कांग्रेसी नेता और भाजपा में राज्यसभा के सांसद हर्ष महाजन के जरिए हिमाचल में कांग्रेस सरकार को मुश्किलें पैदा करने और ऑपरेशन लोटस जो चल रहा था उसे पर भी शायद ब्रेक लग जाएगी राजनीतिज्ञ जानने वाले लोग साफ तौर पर कह रहे हैं भाजपा की इस तरह की कवायत अन्य राज्यों के मुकाबले हिमाचल में कामयाब नहीं हो पाई पहले कांग्रेस के पास चली विधायक थे इसी साल मार्च माह में पार्टी के 6 एमएलए बीजेपी में जाने के बावजूद अब उनके फिर 40 विधायक हो गए हैं प्रधानमंत्री मोदी अमित शाह के लिए जेपी नड्डा भले ही बड़े नेता है लेकिन उनके अपने निर्वाचन क्षेत्र बिलासपुर सदर में कितनी पकड़ है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जहां से चुनाव लड़ते थे वहां पर भाजपा के उम्मीदवार त्रिलोक जमवाल को मात्र 276 वोटो से जीत मिली थी इस जीत पर इलेक्शन पिटिशन भी पेंडिंग है बहरहाल जो भी है इन उपचुनावों में भाजपा को मिली हार को लेकर पूर्व केंद्रीय मंत्री ठाकुर अनुराग ठाकुर के लिए भी अच्छी बात नहीं है मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्कू किस्मत के धनी निकले पहले जब सीएम बने अपने सब विरोधियों को राजनीतिक रूप से कमजोर कर खूब मजबूर कर खुद मजबूत हुए वह भी तब जब लोकसभा में पार्टी चारों सीट सीट हार गई बहरहाल जो भी है कुल मिलाकर ठाकुर सुखविंदर सिंह पार्टी के भीतर की बात हो चाहे बीजेपी को सबक सिखाने की बात हो सब में निखर कर बाहर निकले शायद इसे किस्मत ही कहे या सुखविंदर सिंह का संगठन को लेकर तजुर्बा कहे या अपने आप में सवाल है